महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित कार्यक्रमों के प्रति महिलाओं को जागरूक करनाः एक समाजशास्त्रीय अनुशीलन (जिला: जाँजगीर-चाम्पा के नवागढ़ ब्लाॅक के संदर्भ में)

 

Dr. (Mrs.) Vrinda Sengupta

Asstt. Prof., Dept. of Sociology, Govt.T.C.L.P.G. College, Janjgir (C.G.)

 

महिलाओं एवं बालकों के उपयुक्त विकास हेतु समय-समय पर शासन द्वारा भी अनेक प्रयास किए गए हैं महिला एवं बाल विकास विभाग का गठन भी इसी उद्देश्य की पूर्ति हेतु किया गया है वर्तमान में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा अनेक कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य महिलाओं एवं बच्चों को पोषित भोजन उपलब्ध कराना, समय पर टीकाकरण एवं अन्य उपचार उपलब्ध कराना उनमें साक्षरता का प्रतिशत् बढ़ाना, कन्या भू्रण हत्या रोकना, केवल कन्या का संतान वाले दम्पŸिायों को कन्या पालन-पोषण शिक्षा आदि में सरकारी सहायता देना, महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में सहायता करना आदि है इसके अलावा महिलाओं में अपने अधिकारों के प्रति जागरूक एवं समाज में अपना उचित स्थान प्राप्त करने सक्रिय बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं

 

महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित कार्यक्रम बहुत प्रभावी सिद्ध हुए हैं महिलाओं एवं बच्चों में कुपोषण का स्तर कम हो गया है गाँवों में भी टीकाकरण एवं बीमारियों के सही उपचार हेतु जागृति रही है लिंगानुपात में वृद्धि हुई है बालकों की शाला प्रवेश दर एवं शाला में रूकने की दर में वृद्धि हुई है कन्याओं एवं कन्याओं के पालकों में भी बालिका शिक्षा के प्रति रूचि दिखाई दे रही है केवल बालिका संतान वाले दम्पŸिायों की संख्या में वृद्धि हो रही है प्रसव के समय महिलाओं की मृत्यु दर एवं शिशु मृत्यु दर में कमी आई है महिलाएँ सरकारी सहायता प्राप्त कर स्वयं का व्यवसाय स्थापित कर आत्मनिर्भर बन रही है अस्तु महिलाओं एवं बच्चों के समुचित विकास का उपयुक्त वातावरण तैयार हो रहा है

 

भूमिका

समाज की संरचना में नारी पुरूष समान रूप से सहभागी होते हैं समाज के सहज समग्र विकास के लिए आवश्यक है कि महिलाएँ पुरूषों के समान ही सशक्त सामथ्र्यवान हो वस्तुतः स्त्री पुरूष समाजरूपी गाड़ी के दो पहिए हैं समाजरूपी यह गाड़ी तभी संतुलन रूप से गतिमान होगी, जब दोनों ही पहियों में संतुलन समानता सामंजस्य हो

 

प्राचीन काल में स्त्रियों की स्थिति अच्छी थी मनु ने कहा है कि-यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते सिंधु घाटी भी मातृप्रधान थी वैदिक काल में प्रहलाद, जैसे बालक में सामने आये परन्तु धोषा, विश्वारा, माण्डवी आदि थी तथा प्राचीनकाल में प्रहलाद जैसे बालक सामने आये परन्तु रामायण महाभारत काल में स्त्रियों की दशा में कुछ ह्ास हुआ, किन्तु फिर भी यह काल नारी के गौरव से सुशोभित था मध्य काल में स्त्रियों की दशा में गिरावट आने लगी तथा बच्चों में विशेषतः बालिकाओं की दशा दयनीय हो गई बाल विवाह, पर्दाप्रथा, सतीप्रथा जैसी अनेक बुराईयाँ बढ़ी

 

ब्रिटिश काल में विभिन्न समाज सुधार आन्दोलन एवं स्वतंत्रता संग्राम के आदर्शों से स्त्रियों में चेतना जागृत हुई 1927 में अखिल भारतीय महिला सभा की स्थापना हुई, जिसका मुख्य उद्देश्य महिलाओं में शैक्षणिक एवं सामाजिक कार्य करना था अनेक सुधार आन्दोलनों के फलस्वरूप 1956 में विधवा पुनर्विवाह अधिनियम पारित हुआ 1929 में स्त्रियों को मताधिकार और बाल विवाह पर प्रतिबंध, 1937 में सम्पŸिा अधिकार दिए गए वर्तमान मंे भी भारतीय समाज में महिलाओं की स्थिति दोयम दर्जे की बनी रहती है जीवन के प्रत्येक क्षेत्र मेें पुरूषों से पीछे है

  

उन्हें समाज में समानता का अधिकार प्राप्त नहीं है, यद्यपि वे पुरूषों से कंधा से कंधा मिलाकर वे तेजी से अग्रसर होती विशेषकर समाज में निम्न जीवन स्तर वाले जनता में यह असमानता बहुत अधिक है महिलाएँ सामाजिक आर्थिक दृष्टि से परावलम्बी है उनमें आत्मनिर्भरता का अभाव है वे शिक्षा एवं स्वास्थ्य की दृष्टि से पिछड़ी हुई है जीवन के हर क्षेत्र में यह पिछड़ापन उनकी मानसिकता बन गई है, जो उन्हें अपने अधिकारों के प्रति उदासीन, निष्क्रिय बनाता है महिलाओं की यह मानसिकता उन्हें अपनी पारिवारिक, आर्थिक, सामाजिक भूमिकाओं को सही ढंग से निभाने में बाधक है

 

अध्ययन विषय का परिचय

महिला एवं बाल विकास विभाग का गठन अक्टूबर 1986 में हुआ था महिला एवं बाल विकास विभाग का उद्देश्य निम्न स्तरीय जीवन-यापन कर रहे महिलाओं एवं बच्चों का जीवन स्तर सुधारना है महिला एवं बाल विकास विभाग विभिन्न तरह की योजनाओं का संचालन करता है, जिसे वह प्रत्येक गाँव में आँगनबाड़ी केन्द्र के माध्यम से संचालित करता है इन योजनाओं का लाभ महिलाओं एवं बच्चों को मिलता है, जिससे उनके जीवन स्तर में सुधार आता है

 

अब तक के समय में महिलाओं की स्थिति अत्यन्त ही निम्न रही है निम्न स्तर की महिलाओं एवं बच्चों का स्वास्थ्य स्तर, शैक्षणिक स्तर अत्यन्त निम्न है, उन्हें अनेक प्रकार की बीमारियों का सामना करना पड़ता है, परन्तु उनकी अशिक्षा आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण वे इन कठिनाईयों का सामना ठीक तरह से नहीं कर सकती है परन्तु महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा चलाये गये कार्यक्रमों से धीरे-धीरे आर्थिक, स्वास्थ्य, शैक्षणिक, साँस्कृतिक आदि सभी दृष्टि से विकास हो रहा है

 

महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित योजनाएँ इस तरह है- अनाथालय योजना, निराश्रित बाल गृह, नारी निकेतन, मातृ कुटीर, झूला घर, बाल संरक्षण गृह, बालवाड़ी सह संस्कार केन्द्र, आयुष्मति योजना, बाल समृद्धि योजना, राष्ट्रीय मातृत्व सहायता योजना, पोषण आहार की व्यवस्था, समेकित बाल विकास सेवा योजना, विशेष पोषण आहार कार्यक्रम, Ÿाक पुत्री योजना, राज्य वीरता पुरस्कार, किशोरी शक्ति योजना, महिला जागृति शिविर, अशासकीय संस्थाओं को अनुदान, Ÿाीसगढ़ महिला कोष, स्वयं सिद्धा, स्व-सहायता समूह गठन, महिला उत्पीड़न निवारण समिति का गठन, राज्य समाज कल्याण सलाहकार बोर्ड, महिला  सशक्तिकरण नीति, Ÿाीसगढ़ महिला कोष की ऋण योजना, राज्य महिला आयोग, बाल भोज कार्यक्रम, प्रधानमंत्री ग्रामोदय योजना उपरोक्त लिखे सभी योजनाओं से महिला एवं बच्चांे का विकास होने लगा है, लेकिन इसके बावजूद आवश्यकता इस बात की है कि इसी तरह की गुणी योजनाओं की तरह अन्य कई योजनाओं का संचालन प्रत्येक गाँव में अच्छी तरह से किया जाए, ताकि महिलाओं एवं बच्चों की स्थिति में सुधार आए

 

महत्वः

समाज में महिलाओं की स्थिति दोयम दर्जे की है निम्न जीवन स्तर की अधिकाँश महिलाएँ विशेषकर गर्भवती शिशुवती महिलाएँ कुपोषण से ग्रसित है तथा बच्चों में भी कुपोषण छाया हुआ है इसी कुपोषण के साथ अनेक भयंकर बीमारियाँ तथा समाज का दृष्टिकोण महिलाओं एवं बच्चों का जीवन दूभर बना देता है

 

महिला एवं बाल विकास विभाग इस स्थिति में सुधार लाने हेतु अनेक योजनाएँ संचालित कर रहा है, जिसके लाभ से समाज में महिलाओं एवं बच्चों की स्थिति में सुधार रहा है हमारा भारतीय समाज पुरूष प्रधान समाज है समाज में महिलाओं की स्थिति दोयम दर्जे की है प्रत्येक क्षेत्र में लिंग भेद का सामना करना पड़ता है यह लिंग भेद विशेषकर बालिकाओं के लिए होता है जैसे- भू्रण हत्या, शिक्षा का खर्च वहन नहीं करना आदि

 

इस समस्या के निदान के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा कार्यक्रमों का संचालन किया जा रहा है, जिनसे मिलने वाले लाभ तथा उनसे होने वाले परिवर्तनों का महत्व समाज समझ सकें समाज में महिलाएँ अशिक्षित परावलम्बी  एवं अपने अधिकारों की शक्ति के प्रति उदासीन है यह विभाग विभिन्न योजनाओं द्वारा महिलाओं किशोरियो में जागरूकता लाने तथा अपने अधिकारों के प्रति सजग बनाने का प्रयास कर रहा है

 

इस शोध से यह स्पष्ट होता है कि समाज में महिलाओं को उचित स्थान लेने के लिए पे्ररित करना तथा बच्चों को उनका हक दिलाना ही महिला एवं बाल विकास विभाग का लक्ष्य है

 

शब्द कुँजी

महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित योजनाएँ

’        जीवन स्तर

’        आर्थिक, स्वास्थ्य, शैक्षणिक साँस्कृतिक विकास

 

उद्देश्य

महिला एवं बाल विकास विभाग का उद्देश्य निम्न स्तरीय जीवन-यापन कर रहेय महिलाओं एवं बच्चों का जीवन स्तर सुधारना है

’        विभिन्न स्तर की योजनाओं का संचालन

’        योजनाओं का लाभ महिलाओं एवं बच्चों को मिलता है, जिससे उनके जीवन स्तर में सुधार आता है

’        कार्यक्रमों से धीरे-धीरे उनके आर्थिक, स्वास्थ्य, शैक्षणिक, साँस्कृतिक आदि सभी दृष्टि से विकास हो रहा है

 

उपकल्पना

’        महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित कार्यक्रमों का प्रभाव सकारात्मक पड़ेगा

’        महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित कार्यक्रमों का प्रभाव नकारात्मक पड़ेगा

 

महिला एवं बाल विकास की वर्तमान स्थिति

यदि आपको विकास करना है तो महिलाओं का उत्थान करना होगा महिलाओं का विकास होने पर समाज का विकास स्वतः ही हो जायेगा“                                                                       -जवाहरलाल नेहरू

 

समाज परिवार का ही वृहद् रूप है और इसी परिवार की आधारशिला है नारी जिसके बिना इस परिवार रूपी पौधे के अँकुरित पल्लवित, पुष्पित तथा फलित होने का प्रश्न ही नहीं उठता

 

इतिहास इस बात का साक्षी है कि जब कभी पुरूष प्रधान सभ्यता ने नारी जाति की अवहेलना की, समाज का विकास अवरूद्ध हुआ, उसका पतन हुआ किन्तु जब नारी जाति को मान-सम्मान दिया गया, उसे प्रेरणा, स्फूर्तिदायक जन-जननी का स्थान दिया गया समाज उन्नति के शिखर पर पहुँच गया अर्थात् महिलाओं की स्थिति को सदैव एक जैसा नहीं माना गया एक ओर जहाँयत्र नार्यः पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताअथवा यदि ईश्वर शब्द है तो नारी उसका अर्थ है, जैसी उक्तियाँ प्रचलित है, वहीं दूसरी ओर नारी के समान पोषण को पड़ोसी के पौधे को सींचने के समान बताया है भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी महिलाओं की स्थिति सम्मानजनक नहीं रही है उन्हें हमेशा निकृष्ट ही माना गया है

 

महिलाओं के इस सकारात्मक परिवर्तन ने महिलाओं की स्थिति को प्रभावित किया-

1.       महिलाओं के कार्यक्रमों में ध्यान कल्याण की अपेक्षा विकास पर दिया जाने लगा है इस परिवर्तन का परिणाम महिला विकास हेतु पृथक विभाग की स्थापना की गई

2.       राष्ट्रीय शिक्षा नीति (1980) की क्रियान्विति के कार्यक्रम में महिलाओं की समानता पर बल दिया गया

 

शोध प्रविधि

महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित योजनाओं के प्रति जागरूकता एवं मिलने वाली लाभ के प्रति महिलाओं से साक्षात्कार अनुसूची के माध्यम से सर्वेक्षण पद्धति के द्वारा प्राथमिक सूचनाएँ एकत्र की गई अध्ययन हेतु 50 Ÿारदाताओं का चयन किया गया है

 

उपर्युक्त तालिका से स्पष्ट होता है कि 28 प्रतिशत् महिलाएँ एवं बच्चे अशिक्षित हैं 14 प्रतिशत् हाईस्कूल, 10 प्रतिशत् हायर सेकण्डरी, 20 प्रतिशत् प्राथमिक तथा 28 प्रतिशत् माध्यमिक स्तर की शिक्षा ग्रहण किए हुए हैं

उपर्युक्त तालिका से स्पष्ट होता है कि ग्रामीण महिला एवं बच्चों में 0 से 10 वर्ष की आयु के 20 प्रतिशत्, 10 से 20 वर्ष की आयु के 36 प्रतिशत्, 20 से 30 वर्ष की आयु के 24 प्रतिशत्, 30 से 40 वर्ष की आयु के 20 प्रतिशत् Ÿारदाता हैं

 

उपर्युक्त तालिका से स्पष्ट होता है कि Ÿारदाताओं में 20 प्रतिशत् ब्राह्मण, 10 प्रतिशत् क्षत्रिय, 30 प्रतिशत् कुर्मी, 20 प्रतिशत् धोबी, 18 प्रतिशत् राऊत तथा 2 प्रतिशत् बरई है

 

उपर्युक्त तालिका से स्पष्ट है कि 18 प्रतिशत् गृहणी, 20 प्रतिशत् नौकर, 22 प्रतिशत् खेती तथा 40 प्रतिशत् कोई व्यवसाय नहीं वाले Ÿारदाता हैं

 

उपर्युक्त तालिका से स्पष्ट होता है कि Ÿारदाताओं मे 40 प्रतिशत् विवाहित, 56 प्रतिशत् अविवाहित तथा 4 प्रतिशत् विधवा हैं

 

कानूनी प्रावधान

1.       विधवा विवाह अधिनियम                

2.       दहेज प्रथा अधिनियम

3.       बाल विवाह अधिनियम                   

4.       सती प्रथा अधिनियम

5.       तलाक संबंधी अधिनियम        

6.       बाल शिक्षा विकास हेतु अधिनियम

7.       बाल श्रम निषेध अधिनियम              

8.       हिन्दू Ÿाक तथा भरण-पोषण अधिनियम

9.       महिलाओं का अभद्र प्रदर्शन रोक अधिनियम

 

महिला एवं बाल विकास विभाग के कल्याण कार्यक्रम

1.       अनाथालय योजना                       

2.       निराश्रित बाल गृह योजना

3.       नारी निकेतन                             

4.       मातृ कुटीर/झूला घर

5.       बाल संरक्षण गृह                 

6.       बालवाड़ी सह-संस्कार केन्द्र

7.       आयुष्मति योजना                        

8.       बालिका समृद्धि योजना

9.       राष्ट्रीय मातृत्व सहायता योजना 

10.      पोषण आहार कार्यक्रम

11.      समेकित बाल विकास सेवा योजना       

12.      विशेष पोषण आहार कार्यक्रम

13.      Ÿाक पुत्री शिक्षा योजना                

14.      राज्य वीरता पुरस्कार

15.      किशोरी शक्ति योजना                    

16.      महिला जागृति शिविर

17.      अशासकीय संस्थानों को अनुदान 

18.      बाल शोध कार्यक्रम

19.      प्रधानमंत्री ग्रामोदय योजन                

20.      राज्य महिला आयोग

21.      महिला सशक्तिकरण नीति               

22.      राज्य समाज कल्याण सलाहकार बोर्ड

23.      Ÿाीसगढ़ महिला कोष की             

24.      महिला स्व-सहायता समूह

25.      ऋण योजना

26.      महिला उत्पीड़न निवारण समितियों का गठन

27.      Ÿाीसगढ़ महिला कोष

 

निष्कर्ष

महिला एवं बाल विकास विभाग की स्थिति के अंतर्गत प्राचीन काल में महिलाओं की अत्यन्त ही निम्न थी, जब स्त्रियों की स्थिति ही ठीक नहीं थी, तब उनके संतानों की स्थिति ठीक कैसे हो सकती थी समाज में महिलाओं की स्थिति दोयम दर्जे की थी नारियों के पालन-पोषण को पड़ोसी के पौधों के समान बताया जाता है

 

परन्तु महिला एवं बाल विकास विभाग के गठन के पश्चात् उनके द्वारा संचालित कार्यक्रमों से महिलाओं एवं बच्चों को अनेक तरह के लाभ मिलने लगे ये योजनाएँ Ÿाक पुत्री योजना, आयुष्मति योजना, किशोरी शक्ति योजना, बालिका समृद्धि योजना, समेकित बाल विकास परियोजना, बाल संरक्षण गृह, महिला सशक्तिकरण नीति तथा स्व-सहायता समूह हैं, जिनमें महिलाओं एवं बच्चों की स्थिति में सुधार आने लगा है तथा इस सुधार को कायम रखने के लिए अनेक कानूनी प्रावधान भी किए गए हैं- दहेज प्रथा अधिनियम-1961, बाल विवाह अधिनियम- 1956, सतीप्रथा अधिनियम-1987, तलाक संबंधी अधिनियम, बाल शिक्षा विकास हेतु अधिनियम, बाल श्रम निषेध अधिनियम, हिन्दू Ÿाक तथा भरण-पोषण अधिनियम, महिलाओं का अभद्र प्रदर्शन रोक अधिनियम आदि

 

नवागढ़ ब्लाॅक में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित योजनाओं से प्राप्त आँकड़ों के निष्कर्ष निम्नलिखित हैं:-

शत्-प्रतिशत् Ÿारदाताओं के अनुसार उनके ग्राम में महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाएँ संचालित है शत्-प्रतिशत् Ÿारदाताओं के अनुसार उनके ग्राम में Ÿाक पुत्री योजना, किशोरी शक्ति योजना, बालिका समृद्धि योजना, स्व-सहायता समूह, पोषण आहार कार्यक्रम संचालित है तथा 20 प्रतिशत् Ÿारदाताओं के अनुसार ग्राम में आयुष्मति योजना संचालित है तथा 80 प्रतिशत् के अनुसार संचालित नहीं है 8 प्रतिशत् Ÿारदाताओं के अनुसार ग्राम में बाल संरक्षण गृह है तथा 92 प्रतिशत् के अनुसार नहीं है 30 प्रतिशत् के अनुसार ग्राम में महिला सशक्तिकरण की नीति संचालित है तथा 70 प्रतिशत् के अनुसार नहीं है

  

संदर्भ ग्रंथ सूची

1.       जैन अमिताभ, द्विवेदी उमेश, अवस्थी आलोक, विकास के रास्ते सबके वास्ते, 2001

2.       महिला एवं बाल विकास विभाग, ..शासन सुपोषण नीति

3.       सर्वेक्षण के माध्यम से प्राथमिक आँकड़े

4.       आशुरानी- महिला एवं बाल विकास विभाग

5.       शर्मा दिनेश, जाज्वल्या, 2005

6.       त्रिपाठी संजय, त्रिपाठी चन्दन, Ÿाीसगढ़ वृहद् संदर्भ

                  

 

Received on 23.04.2012

Revised on 14.06.2012

Accepted on 24.6.2012       

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Research J.  Humanities and Social Sciences. 3(3): July-September, 2012, 342-346